माँ :ईश्वर का प्रतिरूप ( मदर्स डे)
माँ :ईश्वर का प्रतिरूप ( मदर्स डे) मदर्स डे के अवसर पर अक्सर एक बात मन में आती है कि "जब हर दिन मां का है, तो एक दिन मदर्स डे क्यों?" फिर विचार मन में आया कि मां का कौन सा दिन नहीं होता? आज सोशल मीडिया के गलियारों में हर तरफ 'हैप्पी मदर्स डे' की गूंज है। स्टेटस और स्टोरीज मां की तस्वीरों से सजी हुई हैं। यह देखकर मन में एक सवाल कौंधता है कि क्या मां वाकई किसी एक खास तारीख की मोहताज है? किसी ने सच ही कहा है— "मां का कोई दिन नहीं होता, बल्कि मां से ही हर दिन होता है।" कैलेंडर की तारीखों से परे मां दुनिया के हर रिश्ते को निभाने के लिए वक्त और तारीखें तय की जा सकती हैं, लेकिन मां का प्रेम चौबीसों घंटे चलने वाली एक ऐसी इबादत है जिसमें कभी 'लंच ब्रेक' या 'हॉलिडे' नहीं होता। हमारे जीवन का हर दिन मां के संघर्षों की नींव पर टिका होता है। सुबह की पहली चाय से लेकर रात को माथे पर रखे जाने वाले सुकून के हाथ तक, वह हर पल हमारे अस्तित्व को संवारती है। आज के दौर में हम स्टेटस लगाकर दुनिया को यह तो बता देते हैं कि हम अपनी मां से कितना प्यार करते हैं, लेकिन अ...